India to Divert 3.5 Lakh Tonnes of Export Sugar to Local Market
पिछले कुछ हफ्तों से देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेज़ी देखी जा रही थी, और अब सरकार ने इस पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने रिफाइनर्स और प्रोसेसर्स को ये मंज़ूरी दे दी है कि वो एक्सपोर्ट के लिए तय की गई करीब 3.5 लाख टन चीनी को घरेलू बाज़ार में बेच सकें, ताकि सप्लाई की कमी को दूर किया जा सके और फेस्टिव सीज़न से पहले कीमतों पर काबू पाया जा सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोसेसर्स अगले एक हफ्ते के भीतर ही ये स्टॉक घरेलू खरीदारों तक पहुंचा सकते हैं। इतनी मात्रा भारत की करीब पांच दिनों की कुल चीनी डिमांड को पूरा करने के लिए काफी है, और इससे पिछले हफ्ते रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
आखिर ये पूरी दिक्कत शुरू कहां से हुई? दरअसल भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, इस साल फसल की पैदावार उम्मीद से कम रहने की वजह से सप्लाई की तंगी झेल रहा है। अनियमित बारिश और मुख्य उत्पादक इलाकों में बीमारियों की वजह से फसल को नुकसान पहुंचा। हालांकि इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निरज शिरगांवकर ने साफ किया कि असल में चीनी की कोई कमी नहीं है, बल्कि घबराहट में हुई खरीदारी (पैनिक बाइंग) की वजह से कीमतें अचानक बढ़ गईं। उन्होंने बताया कि 2025-26 सीज़न के लिए नेट चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है, और इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई चीनी का हिसाब लगाने के बाद भी क्लोज़िंग स्टॉक करीब 35 लाख टन रहेगा, जो सामान्य घरेलू मांग के लिए एक अच्छा-खासा बफर है।
सरकार के नए नियमों के तहत सिर्फ एक्सपोर्ट वाली चीनी को डायवर्ट करना ही एकमात्र कदम नहीं है। सरकार ने 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री चीनी इम्पोर्ट की भी मंज़ूरी दे दी है, ताकि घरेलू उपलब्धता और मज़बूत हो सके। एक्सपोर्ट-बाउंड स्टॉक को रिलीज़ करने का फायदा ये है कि इससे तुरंत राहत मिल जाएगी, बिना इम्पोर्ट के पहुंचने का इंतज़ार किए। हालांकि आगे चलकर इम्पोर्ट की ज़रूरत फिर भी पड़ेगी, लेकिन ये अतिरिक्त सप्लाई तब तक कीमतों को काबू में रखने में मदद करेगी जब तक ब्राज़ील से चीनी की खेप नहीं पहुंच जाती।
कीमतों की बात करें तो नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाईकनवरे के मुताबिक, पिछले हफ्ते अपने पीक पर भारतीय एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। लेकिन सरकार के 20 अगस्त के ऐलान (ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की मंज़ूरी) के बाद से कीमतें घटकर अब करीब 54-55 रुपये प्रति किलो तक आ गई हैं। महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमतें 5,400 से 5,560 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थीं, और 18 अगस्त को रिटेल चीनी की कीमत करीब 52.30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जबकि एक साल पहले यही कीमत सिर्फ 46.34 रुपये प्रति किलो थी।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर घरों के बजट, मिठाई बनाने वालों, रेस्टोरेंट्स, और फूड कंपनियों — सभी पर पड़ा, क्योंकि इन सबकी लागत बढ़ गई। यही वजह है कि सरकार का ये कदम सिर्फ बड़े इंडस्ट्री प्लेयर्स के लिए नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी सीधी राहत माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, सरकार की ये दोहरी रणनीति — एक तरफ एक्सपोर्ट स्टॉक को घरेलू बाज़ार में डायवर्ट करना, और दूसरी तरफ ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट को मंज़ूरी देना — आने वाले फेस्टिव सीज़न से पहले चीनी की कीमतों को स्थिर रखने की एक ठोस कोशिश है। अब देखना ये है कि ब्राज़ील से चीनी की खेप पहुंचने तक कीमतें किस स्तर पर टिकती हैं।