US Slaps New 10% Tariff on India, 45% of Exports Remain Safe
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड को लेकर एक और बड़ा अपडेट आया है, लेकिन इस बार खबर पूरी तरह बुरी नहीं है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर एक नया 10% टैरिफ लगा दिया है, लेकिन साथ ही सरकार ने राहत की बात भी बताई — भारत के करीब 45% एक्सपोर्ट्स को इस नए टैरिफ से पूरी तरह छूट मिली रहेगी।
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने 23 जुलाई 2026 को Section 301 ऑफ द ट्रेड एक्ट, 1974 के तहत ये फाइनल फैसला सुनाया। ये पूरा मामला जुड़ा है फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मज़दूरी से बने सामानों के इम्पोर्ट को रोकने से जुड़े नियमों की जांच से, जो USTR ने भारत समेत दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाओं पर की थी। ये नया टैरिफ 24 जुलाई 2026 से लागू हो चुका है।
सबसे बड़ी राहत की बात ये है कि भारत को इस जांच में सबसे कम यानी 10% वाले टैरिफ ब्रैकेट में रखा गया है, जबकि शुरुआत में USTR ने भारत के लिए 12.5% टैरिफ का प्रस्ताव रखा था। सरकार का कहना है कि जांच के दौरान भारत की तरफ से लगातार अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत, लिखित जवाब, और फोर्स्ड लेबर रोकने के लिए फॉरेन ट्रेड पॉलिसी में किए गए बदलावों की वजह से ही टैरिफ रेट कम हो पाया।
अब बात करते हैं उस राहत भरे 45% वाले हिस्से की। सरकार के मुताबिक, जेनरिक फार्मास्युटिकल्स, स्मार्टफोन्स, और कुछ खास तय किए गए प्रोडक्ट्स, जिन पर पहले से ही ज़ीरो एडिशनल ड्यूटी लगती है, वो इस नए टैरिफ से बाहर रहेंगे। इसके अलावा स्टील, एल्युमिनियम, और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रोडक्ट्स, जो पहले से ही Section 232 के तहत कवर होते हैं, उन पर भी ये नया टैरिफ लागू नहीं होगा।
लेकिन सिक्का का दूसरा पहलू भी है। बाकी बचे करीब 55% एक्सपोर्ट्स पर ये नया 10% टैरिफ लागू होगा, जिससे टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, और लेदर प्रोडक्ट्स जैसी लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज़ पर असर पड़ने की आशंका है — यानी वो सेक्टर्स जहां काफी बड़ी तादाद में लोग काम करते हैं।
सरकार ने ये भी साफ किया कि टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर अमेरिका ने जिस मैकेनिज्म का ज़िक्र किया है, वो अभी तक स्थापित और लागू नहीं हो पाया है, यानी इसे लेकर आगे और स्पष्टता आने की उम्मीद है। भारत सरकार ने ये भी दोहराया कि वो अमेरिका के साथ India-US Bilateral Trade Agreement (BTA) को जल्द फाइनल करने की दिशा में लगातार काम कर रही है, जिसका ज़िक्र 2 फरवरी 2026 को हुई घोषणा और 7 फरवरी 2026 के ज्वाइंट स्टेटमेंट में भी हो चुका है।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर ये कहानी पिछले करीब एक साल से लगातार उतार-चढ़ाव भरी रही है — पहले 25% रेसिप्रोकल टैरिफ, फिर रूसी तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त 25% पेनल्टी, कुल मिलाकर 50% तक टैरिफ, और फिर फरवरी 2026 में हुई ट्रेड डील के बाद उसमें राहत। अब ये नया 10% टैरिफ एक अलग वजह — फोर्स्ड लेबर जांच — से जुड़ा हुआ है, और पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ मसले से अलग है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत का ये तुलनात्मक रूप से कम टैरिफ रेट (कई दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले) भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए एक छोटी राहत ज़रूर है, लेकिन टेक्सटाइल और लेदर जैसे सेक्टर्स के लिए आने वाले महीने चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।
फिलहाल के लिए इतना साफ है कि भारत ने बड़ी बात यही हासिल की है कि ज़्यादातर अहम एक्सपोर्ट सेक्टर्स को सुरक्षित रखा जा सका है, जबकि बाकी बचे मुद्दों को लेकर बातचीत अभी जारी है।