Aravalli Hills को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने लिया रौद्र रूप, अवैध खनन पर सीधा ‘Red Signal’, कहा—’इस बर्बादी को रोका नहीं गया तो सब ख़त्म हो जायेगा’, जानिये क्या है वो नया आदेश जिससे पहाड़ फिर से सांस ले पाएंगे!
देखिये, अगर आप दिल्ली-NCR या राजस्थान में रहते हैं, तो आपको पता होगा कि Aravalli Range हमारी “Life Line” है। ये पहाड़ नहीं होते, तो थार रेगिस्तान (Thar Desert) अब तक आपके घर के दरवाज़े तक पहुँच चुका होता। लेकिन खनन माफियाओं (Mining Mafia) ने इसे छलनी कर दिया है। अब Supreme Court ने 21 जनवरी 2026 को इस मामले में ऐसी सख्ती दिखाई है कि सबकी हवा टाइट है। कोर्ट ने साफ़ कह दिया है—”अवैध खनन (Illegal Mining) को किसी भी कीमत पर रोकना होगा, वरना जो नुकसान होगा उसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी।” का कही बाबू, अब त कोर्ट खुद मैदान में उतर गइल बा!
कोर्ट का ‘Stay’ और 100 मीटर वाला पेंच
मामला क्या था? दरअसल, नवंबर 2025 में एक फैसला आया था कि सिर्फ 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही ‘अरावली’ माना जायेगा। इससे डर था कि छोटी पहाड़ियों को खनन वाले निगल जायेंगे। लेकिन Chief Justice Surya Kant की बेंच ने इस फैसले पर Stay (रोक) लगा दिया है। कोर्ट ने कहा—”रुको भाई, ऐसे तो 90% अरावली गायब हो जाएगी!”
21 जनवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने एक Expert Committee बनाने का ऐलान किया है। यह कोई सरकारी बाबुओं वाली कमेटी नहीं होगी, बल्कि इसमें देश के टॉप Environmentalists (पर्यावरणविद), वैज्ञानिक और जियोलॉजिस्ट शामिल होंगे। सबसे बड़ी बात, यह कमेटी सीधे Supreme Court के कण्ट्रोल में काम करेगी। मतलब बीच में कोई “Setting” नहीं हो पायेगी। अरे भाई, अब त एक-एक पत्थर का हिसाब होई!
राजस्थान सरकार ने जोड़ा हाथ: “हम नहीं होने देंगे खनन”
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की तरफ से पेश हुए ASG K.M. Nataraj ने कोर्ट को भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, “माई लॉर्ड, हम कसम खाते हैं कि अरावली में कोई भी अवैध खनन नहीं होने देंगे।” कोर्ट ने इस भरोसे को Record पर ले लिया है। मतलब अगर अब खनन हुआ, तो यह सीधे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना (Contempt) होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध खनन सिर्फ चोरी नहीं है, यह पर्यावरण की हत्या है। अगर पहाड़ ही नहीं रहेंगे, तो पानी कहाँ से आएगा और हवा साफ़ कैसे होगी? कोर्ट ने सभी पक्षों से 4 हफ्ते के अंदर एक्सपर्ट्स के नाम मांगे हैं।
निष्कर्ष
तो, कुल मिला के बात ये है कि अरावली को बचाने की यह शायद आखिरी लड़ाई है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम रेगिस्तान को दिल्ली घुसने से रोकने के लिए “Brahmastra” साबित हो सकता है। अगर यह एक्सपर्ट कमेटी सही से काम कर गयी, तो आने वाली पीढ़ियों को भी पहाड़ देखने को मिलेंगे, वरना सिर्फ किताबों में फोटो रह जाएगी। अब देखना ये है कि राजस्थान सरकार अपना वादा कितना निभा पाती है!
मेरे विचार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनी ही पुरानी परिभाषा (100 मीटर रूल) पर रोक लगाना यह दिखाता है कि न्यायपालिका पर्यावरण को लेकर कितनी गंभीर है। यह “Expert Committee” का गठन एक गेम-चेंजर है क्योंकि इसमें नौकरशाही (Bureaucracy) से ज्यादा विज्ञान (Science) की चलेगी, जो अरावली के अस्तित्व के लिए जरुरी है।