ICRISAT और ICAR ने मिलकर रच दिया इतिहास, पेश किया दुनिया का पहला ‘Three-Way Cross’ बाजरा हाइब्रिड ‘RHB 273’, सूखाग्रस्त इलाकों में भी अब लहलहाएगी फसल, जानिये इसकी खासियत और पैदावार!
देखिये, अगर आप राजस्थान, गुजरात या हरियाणा के सूखे इलाकों में खेती करते हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है। ICRISAT और ICAR ने मिलकर बाजरे (Pearl Millet) की एक ऐसी नई किस्म RHB 273 विकसित की है जो दुनिया में अपनी तरह की पहली है। इसे “Three-Way Hybrid” तकनीक से बनाया गया है। का कही बाबू, अब कम बारिश में भी कोठिला अनाज से भर जाई! जहाँ पुराना बाजरा सूख जाता था, वहां यह नया बीज चट्टान की तरह खड़ा रहेगा और पैदावार भी ज्यादा देगा।
क्या है ‘Three-Way Hybrid’ और इसमें क्या है खास?
आम तौर पर हाइब्रिड बीज दो माता-पिता (Parents) के मिलन से बनते हैं, लेकिन RHB 273 को तीन अलग-अलग बीजों (Parental Lines) के गुणों को मिलाकर बनाया गया है। इसका फायदा यह है कि इसमें Climate Resilience (मौसम झेलने की क्षमता) कूट-कूट के भरी है।
इसकी मुख्य विशेषताएं (Key Features):
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बंपर पैदावार: यह हाइब्रिड औसतन 2,230 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अनाज देता है। यह पुराने बीजों (जैसे HHB 67 Improved) से लगभग 28% ज्यादा है।
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रोग प्रतिरोधक (Disease Resistant): इसमें बाजरे के सबसे बड़े दुश्मन—Downy Mildew (तुलासिता), Blast और Smut (कंडुआ) जैसे रोगों से लड़ने की जबरदस्त ताकत है।
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दोहरा फायदा (Dual Purpose): यह सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए बेहतरीन चारा (Fodder) भी देता है। इसका चारा ज्यादा पौष्टिक और पचाने में आसान है।
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सूखा भी बेअसर: यह खास तौर पर उन इलाकों के लिए बना है जहाँ साल में 400mm से कम बारिश होती है।
किन राज्यों के लिए है यह वरदान?
वैज्ञानिकों ने इसे खास तौर पर भारत के “A1 Dryland Zones” के लिए तैयार किया है। इसमें मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के सूखे इलाके शामिल हैं। अगर आपके यहाँ पानी की कमी है और गर्मी ज्यादा पड़ती है, तो यह बीज आपके खेत का सबसे अच्छा दोस्त साबित होगा।
निष्कर्ष
तो, अगर आप बाजरे की खेती में नुकसान से डरते हैं, तो अगली बुवाई में RHB 273 जरूर आज़माएं। यह न केवल आपकी आमदनी बढ़ाएगा बल्कि आपके पशुओं की सेहत भी सुधारेगा। विज्ञान ने अपना काम कर दिया है, अब बारी आपकी है इसे खेत में उतारने की। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क करें और इस नए बीज की जानकारी लें!
मेरे विचार
दुनिया का पहला थ्री-वे हाइब्रिड होना भारत के कृषि वैज्ञानिकों की बहुत बड़ी जीत है, यह बीज जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से लड़ने में हमारे किसानों का सबसे बड़ा हथियार बनेगा।